neeyat
Monday, 27 June 2011
बातें हों तो सिर्फ अच्छे इंसान की
बात कब्र कि हो, या हो मकान की
बात कब्रिस्तान की हो, या हो शमसान की
बात इतिहास की हो ,या हो दास्ताँ की
क्या फर्क पढ़ता है कौमे कोई भी हों ,बातें हों तो सिर्फ अच्छे इंसान की
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