neeyat
Saturday, 2 July 2011
neeyat: बातें हों तो सिर्फ अच्छे इंसान की
neeyat: बातें हों तो सिर्फ अच्छे इंसान की: "बात कब्र कि हो, या हो मकान की बात कब्रिस्तान की हो, या हो शमसान की बात इतिहास की हो ,या हो दास्ताँ की क्या फर्क पढ़ता है कौमे कोई भी हों ..."
neeyat: तुम्हें सब मालूम है
neeyat: तुम्हें सब मालूम है: "तुम्हें मालूम नहीं तुम क्या नहीं हो सके तुम्हें मालूम नहीं तुम क्या नहीं हो तुम्हें मालूम नहीं तुम क्या नहीं हो सकते ,फिर भी दावा है कि तु..."
Monday, 27 June 2011
तुम्हें सब मालूम है
तुम्हें मालूम नहीं तुम क्या नहीं हो सके
तुम्हें मालूम नहीं तुम क्या नहीं हो
तुम्हें मालूम नहीं तुम क्या नहीं हो सकते ,फिर भी दावा है कि तुम्हें सब मालूम है
बातें हों तो सिर्फ अच्छे इंसान की
बात कब्र कि हो, या हो मकान की
बात कब्रिस्तान की हो, या हो शमसान की
बात इतिहास की हो ,या हो दास्ताँ की
क्या फर्क पढ़ता है कौमे कोई भी हों ,बातें हों तो सिर्फ अच्छे इंसान की
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